हरिकृष्ण देवसरे बालसाहित्य न्यास २०१४-१५ गतिविधि सारांश.




हमारे बारे में

हरिकृष्ण देवसरे बालसाहित्य ट्रस्ट की स्थापना का मूल उद्देश्य बालसाहित्य की ऐसी लेखनी को प्रोत्साहन देना है जो बच्चों की वैज्ञानिक सोच और रुचि को बढ़ावा दे। साथ ही साथ हम उन लेखकों को सहयोग भी देना चाहते हैं जो इस शैली से जुड़े हुए हैं एवं इसके रूप को निखारने और संवारने में एक अहम भूमिका निभा रहे हैं।

 इस ट्रस्ट के माध्यम से हम डाॅ हरिकृष्ण देवसरे की सोच को एक कदम आगे ले जा रहे हैं। कई विख्यात सदस्य इस संकल्प में हमारे साथ जुड़े हुए हैंः

  • श्रीमती सुरेखा पाणंदीकर
    श्री मानस रंजन महापात्र

    भारतीय शैक्षिक कार्यकर्ता, कवि और वरिष्ठ संपादक श्री मानस रंजन महापात्र - "नेशनल बुक ट्रस्ट" में "नेशनल सेंटर फॉर चिल्ड्रनस लिटरेचर" के प्रमुख एवं संपादक के रूप में कार्यरत हैं. रचनात्मक लेखन एवं संपादन का ३९ वर्षों से अधिक का समृद्ध अनुभव. आप कई महत्वपूर्ण संस्थाओं - साहित्य अकादेमी, ललित कला अकादेमी, विज्ञान प्रसार आदि में विशेषज्ञ पैनल के सदस्य रह चुके हैं. मानस रंजन जी कई प्रमुख शैक्षिक संस्थाओं के शिक्षण संकाय में भी शामिल रह चुके हैं - दिल्ली विश्वविद्यालय, इग्नू, उत्कल विश्वविद्यालय उल्लेखनीय हैं.

  • देवेंद्र मेवाड़ी

    देवेंद्र मेवाड़ी हिंदी के उन गिने चुने लेखकों में हैं जिन्होंने हिंदी में विज्ञान कथाओं और लेखन की कमी को पूरा करने की भरसक कोशिश की है। वनस्पति विज्ञान में एम.एस.सी हिंदी में एम.ए और पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा। लोकप्रिय विज्ञान की दर्जन भर पुस्तकें तीन विज्ञान कथा संग्रह। विज्ञान लोकप्रियकरण के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार, आत्माराम पुरस्कार, भारतेंदु हरिश्चंद पुरस्कार, मेदिनी पुरस्कार आदि से सम्मानित।

  • श्री रमेश तैलंग
    श्री रमेश तैलंग

    श्री रमेश तैलंग मध्य-प्रदेश के जाने-माने कवि, ग़ज़ल गीतकार एवं बाल कवि हैं। वे कई वर्षों तक हिन्दुस्तान टाइम्स समूह में कार्यरत रहे। वे देश की प्रमुख पत्रिकाओं में कविताएं, समीक्षाएं एवं लेख लिखते रहे हैं। ‘सदी के आखिरी दौर में‘, ‘द एंचेंटमेंट आॅफ मेमोरी‘ उनकी अमूल्य रचनाओं में से हैं। उनकी कविताएं ‘द बेस्ट पोएम्स एंड पोएटस आॅफ 2001‘ में शामिल हैं। उन्हें केन्द्रीय साहित्य अकादमी, दिल्ली के बालसाहित्य पुरस्कार तथा अन्य कई संस्थाओं द्वारा उत्कृष्ट बालसाहित्य सृजन के लिए सम्मानित किया गया है।

  • श्री बालस्वरूप राही
    श्री बालस्वरूप राही

    श्री बालस्वरूप राही दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में सेवारत थे। वे साप्ताहिक हिन्दुस्तान में उपसंपादक के पद का कार्यभार भी संभाल चुके हैं। वे ‘प्रोब इंडिया‘ के प्रथम संपादक तथा परिकल्पनाकार बने साथ ही साथ भारतीय ज्ञानपीठ के सचिव भी। ज्ञानपीठ में रहते उन्होंने नई पीढ़ी प्रतियोगिता जैसी कई योजनाओं का प्रवर्तन किया। उन्होंने हिन्दी की सभी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं के लिए अनेकानेक कविताएं, लेख एवं व्यंग्य रचनाएं लिखी हैं।

  • श्रीमती मधु पंत
    श्रीमती मधु पंत

    श्रीमती मधु पंत ने ‘हिन्दी के लघु उपन्यासों में बाल मनोविज्ञान‘ के विषय पर पी.एच.डी. किया। राष्ट्रीय बाल भवन के निर्देशक के रूप में उन्होंने बालश्री योजना तथा बालसाहित्य के लेखकों, प्रकाशकों एवं पाठकों के संवाद का आरंभ किया। अपने अमूल्य योगदान के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हैं जिनमें Nippon Hosso Kyoto Award, नेहरू बाल समिति का बाल मित्र अवाॅर्ड, हिन्दी अकादमी अवाॅर्ड, भारतीय प्रकाशक महासंघ एवं भारतीय विज्ञान लेखक संघ के सम्मान और इंडियन सेक्शन आॅफ इंटरनेशनल बोर्ड आॅन बुक्स फाॅर यंग पीपल का लाईफटाइम अवाॅर्ड सम्मिलित हैं।

  • श्री विमलेश कांती वर्मा
    श्री विमलेश कांती वर्मा

    श्री विमलेश कांती वर्मा भारत की सर्वोच्च हिन्दी सलाहकार समिति के सदस्य हैं। वे दिल्ली विश्वविद्यालय में लगभग 50 वर्षों से स्नातक तथा स्नातकोत्तर स्तर पर हिन्दी साहित्य का अध्यापन कर रहे हैं। इसके पूर्व वे टोरंटो विश्वविद्यालय, कनाडा सोफिया विश्वविद्यालय तथा अन्य कई अंतर्राष्ट्रीय स्तरों पर हिन्दी साहित्य का अध्यापन कर चुके हैं। हिन्दी भाषा और साहित्य पर 25 पुस्तकें लिख चुके श्री विमलेश कांती वर्मा को राष्ट्रपति द्वारा प्रदत्त महापंडित राहुल सांकृत्यायन (2012) तथा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदत्त विदेश प्रसार सम्मान (2013) प्राप्त है।