लेखक के विषय में

डाॅ हरिकृष्ण देवसरे ने हिंदी बालसाहित्य को एक युगप्रवर्तनकारी मुकाम देने का काम किया। उन्होंने न केवल प्रचुर मा़त्रा मे बाल साहित्य रचा बल्कि इस क्षेत्र में अनेक नई बहसों और आंदोलनों को जन्म देने का श्रेय भी उन्हें प्राप्त है। ये बहसें और आंदोलन हिंदी बाल साहित्य में आधुनिकताबोध तथा उसकी प्रासंगिकता को बनाए रखने के लिए आवश्यक थे।

ऐसे आंदोलनों से वे न सिर्फ स्वयं जुड़े, बल्कि नए लोगों को जुड़ने के लिए सतत प्रेरित- प्रोत्साहित करते रहे। बाल साहित्य शोध के क्षेत्र में डाॅ देवसरे ने ही सर्वप्रथम दस्तक दी। संपादकी में कदम रखा तो ‘पराग‘ को आधुनिक दृष्टि से संपन्न किया, पत्रकारिता के नए मानक कायम किए। उनके संपादन में निकले अंक आज भी स्तरीय बाल साहित्य तथा उत्कृष्ट संपादन की कसौटी माने जाते हैं। बाल साहित्य संपादन के क्षेत्र में उनकी भूमिका आज मील का पत्थर बन गई है।

 अनुवाद कर्म से जुड़े तो बाल साहित्य से लेकर बाल मनोविज्ञान तक इतनी अनूदित पुस्तकें दीं कि देशी-विदेशी धरोहरों से हिंदी बाल साहित्य निखर उठा। कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, जीवनी, समीक्षा, आलोचना, संस्मरण आदि लेखन के जितने भी क्षेत्रए जितने रंग तथा विधाएं हैं, उन सभी में उन्हाने भरपूर साहित्य रचा। बाल साहित्य संबंधी गतिविधियों में वे बढ़-चढ़कर भग लेते रहे।

 राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के अनुभाग, राष्ट्रीय बाल साहित्य केंद्र की बाल साहित्य संबंधी गतिविधियों में उनकी अपूर्व भागीदारी रही। इसी तरह नंशनल बाल भवन के द्वारा आयोजित बाल साहित्य गतिविधियों में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

 उन्होंने बाल साहित्य से जुड़े अनेक कार्यक्रमों का संयोजन-समन्वय किया। साहित्य अकादमी बाल साहित्य पुरस्कार, हिंदी अकादमी के विभिन्न पुरस्कारों, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा प्रदत्त ‘बाल साहित्य भारती‘ बच्चों में विज्ञान-लोकप्रियकरण हेतु राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद का सर्वोच्च पुरस्कार, प्रथम वात्सल्य पुरस्कार सहित विभिन्न पुरस्कार-सम्मानों से विभूषित डाॅ हरिकृष्ण देवसरे भारतीय बाल साहित्य के ‘शलाका पुरुष‘ हैं। बाल साहित्य के क्षेत्र में उन्होंने निरंतर नए प्रयोग किए, जिनका प्रमाण उनकी तीन सौ से अधिक पुस्तकें हैं। भारतीय बाल साहित्य का इतिहास उनके बिना अधूरा है।

 डाॅ हरिकृष्ण देवसरे के अतुल्य योगदानों ने कई लोगों के मन पर अमिट छाप छोड़ी है जो उनकी प्रशंसा करते नहीं थकतेः

‘‘बालसाहित्य के आप अधिकारी विद्वान और लेखक हैं। आपका जीवन इसी साहित्य को समर्पित रहा है। लेखन, संपादन, चिंतन और अधुनातन मनन, यह सब आपकी अत्यंत महत्वपूर्ण पुस्तक ‘बाल साहित्य: मेरा चिन्तन‘ मं मौजूद है। ‘‘- कमलेश्वर  ‘‘डाॅ हरिकृष्ण देवसरे बालसाहित्य-समाज के एक विशिष्ट ही नहीं, अनिवार्य हस्ताक्षर हैं। वे ऐसे कथाशिल्पी भी हैं जिन्होंने अपने विपुल लेखन-कार्य से उन विधाओं में अपनी सशक्त पहचान बनाई है जिनकी ओर ध्यान जाना न केवल आवश्यक ही था बल्कि चुनौतीपूर्ण भी था।‘- डाॅ गंगाप्रसाद विमल

‘‘डाॅ हरिकृष्ण देवसरे ने हिंदी में ‘बालसाहित्य‘ को प्रतिष्ठित करने के साथ ही उसे आधुनिक युग की आवश्यकताओं के अनुरूप् नई दिशा देने में भागीरथ जैसा प्रयास किया है।‘‘- डाॅ नामवर सिंह ‘‘डाॅ हरिकृष्ण देवसरे का नाम न केवल बालसाहित्य के अध्येताओं के बीच, बल्कि तथाकथित गंभीर साहित्य के अध्येताओं के बीच भी जाना-पहचाना है।‘- डाॅ केदारनाथ सिंह